अनशन में बैठकर फंस गए जिला पंचायत सदस्य दामोदर कांत, कोई तुड़वाने भी नहीं जा रहे है …, कांग्रेस का जिला सचिव भी है

बिलासपुर। मस्तूरी क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य दामोदर कांत को क्षेत्र की समस्या लेकर अनशन में बैठना मंहगा पड़ गया है। भूख से तिलमिला रहे कांग्रेस नेता अनशन तोड़ना तो चाहते है लेकिन कोई पूछ तक नहीं रहा है। दर असल वह कांग्रेस के जिला सचिव भी है लेकिन अनशन स्थल में लगे बैनर पोस्टर में न पार्टी का कोई जिक्र है और न ही किसी नेता का फोटो है। यही कारण है कि न तो पार्टी पूछ रही है और न ही अधिकारी अनशन खत्म कराने कोई प्रयास कर रहे है।

नेताओं की चालबाजी कभी कभी उसी को भारी पड़ जाता है। चालाकी के कारण न तो वह पार्टी के रह जाते है और न ही जनता के हो पाते है। दरअसल बात हो रही कांग्रेस के जिला सचिव और जिला पंचायत सदस्य दामोदर कांत की। पिछले तीन दिन से वह क्षेत्र की समस्या को लेकर दर्रीघाट में अनशन पर बैठ गए है। इस अनशन में उनके कुछ करीबी लोग साथ दे रहे है लेकिन पार्टी के कार्यकर्ताओं का कोई साथ नहीं मिल रहा है। इसके लिए वह खुद भी जिम्मेदार है। अनशन में बैठने से पहले जिला प्रशासन को ज्ञापन तो सौंपा लेकिन अपनी ही पार्टी को भरोसे में नहीं लिया। बिना संगठन को जानकारी दिए अनशन में बैठ गए है। यही नहीं जिस पंडाल में अनशन में बैठे है उसमें न तो पार्टी का कोई जिक्र है और न ही कांग्रेस के किसी नेता का फोटो लगा है। व्यक्तिगत राजनैतिक लाभ उठाने के चक्कर में अकेले ही श्रेय लेने के लिए अनशन में बैठ गए है। इसका नतीजा ये हो रहा है कि पार्टी का कोई आदमी पंडाल के आसपास भी नहीं फटक रहे है। ऊपर से आंदोलन अनशन वाली होने से भूख से भी कलबला रहे है। वह अनशन को जल्द ही खत्म करना चाहते है लेकिन अनशन तुड़वाने कोई जा ही नहीं रहे है। भूख से कलबला रहे है वो अलग। यदि गुरुवार तक कोई नहीं गया तो खुद ही अनशन खत्म कर सकते है। बता दे दामोदर कांत जिला पंचायत का चुनाव निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में लड़ा था और कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र गंगोत्री को हराकर जीता था। चुनाव जीतने के बाद वह कांग्रेसी हो गया है। उसे संगठन ने जिला सचिव भी बनाया है। जिस महेंद्र गंगोत्री को हराकर जिला पंचायत सदस्य बना है वही आजकल कांग्रेस के जिला अध्यक्ष है। फिलहाल दामोदर कांत को तहसीलदार, SDM या जनपद पंचायत के CEO जैसे किसी अधिकारी का इंतजार है जो पानी पिलाकर अनशन तुड़वा दे और वह पंडाल समेटकर अपने घर लौट जाएं।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर +919406157580
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