पत्रकार देवदूत के समान, उनके करोड़ों मुख होते है, पत्रकारिता के पित्र पुरुष डॉ वेद प्रकाश वैदिक ने एबीयू के वेबिनार को किया संबोधित

बिलासपुर। अटल बिहारी बाजपेयी विवि में कोविड-19 की प्रभावी प्रबंधन मे जनसंचार माध्यमों की भूमिका विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबीनार में पत्रकारिता जगत के पित्र पुरुष डॉ वेद प्रकाश वैदिक ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा की पत्रकारिता जगत में पत्रकार को ईश्वर से भी अधिक प्रभावशाली बताया। पत्रकार अपनी वाणी से, कलम से, अपने अनुभव के अनुसार करोड़ों लोगों को प्रभावित करते है। पत्रकारों को संयम और मर्यादा का ध्यान रखते हुए सत्य में अटल रहने के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकार सहस्त्र मुख नहीं, कोटी मुख वाले होते है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लोंगों से कहा कि वो खबरों को दिखाने में थोड़ा संयम बरते वही नैतिक जिम्मेदारी का भी ख्याल रखे। इस महामारी में यदि कोई दवाओं की कालाबाजारी करता है, मेडिकल उपकरणों की कालाबाजारी करता है तो उसकी पोल खोलें और उसे सजा दिलाने में अपनी भूमिका निभाएं। पत्रकारों को भी आत्ममंथन करना चाहिए। व्यक्तिगत स्वार्थ, गैर राजनीतिक सोच के साथ जनता के हित में कार्य करना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक दलों को नसीहत देते हुए कहा कि वर्तमान संकट काल में आपस मतभेद में छोड़कर राष्ट्रहित में जनता के लिए कार्य करना चाहिए। आज देश के राजनीतिक दलों के पास 15 करोड़ से अधिक राजनीतिक कार्य करता है। जबकि भारत की जनसंख्या 1 अरब 30 करोड़ है। अगर एक कार्यकर्ता भी 10 लोगों की जिम्मेदारी लेता है तो यह कार्य बहुत बड़ा पुनीत कार्य होगा। यह बहुत बड़ी मदद होगी।करोना काल में हिंदी अखबारों के द्वारा आचार विचार व्यवहार स्वास्थ्य गत इस महामारी काल में लेखों से जनता की जो भलाई कर रहे हैं। उन पत्रकार समूहों को साधुवाद दिया। उन्हें देवदूत की संज्ञा दी वहीं उन्होंने खबर पालिका का एक नया नाम दिया। सरकार की ओर ध्यान दिलाते हुए लगातार जब हमारे पत्रकार बंधु इस महामारी के बीच में जाकर खबरों का निष्पादन कर रहे हैं और मृत्यु को भी प्राप्त हो रहे हैं। उन्हें इस पुनीत कार्य के लिए सम्मानित करें। तथा उनके परिवारों को आर्थिक सहायता भी सरकार करें। जिससे पत्रकार निर्भय होकर अपने कार्य को मूर्त रूप दे सके।

प्रोफेसर शशीकांत शर्मा पत्रकारिता व जनसंपर्क विभाग हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से बोलते हुए कहा कि सकारात्मक एवं नकारात्मक खबरों का असर जनमानस को प्रभावित करते है। वर्तमान समय में इसका क्या फायदा क्या नुकसान है यह बता पाना अत्यधिक कठिन है। क्योंकि यह महामारी अभी चल रही है भविष्य के वर्षों में इसका भी सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर 2009 में जब चीन में H-1 वायरस आया था उस समय पत्रकारिता का जनमानस पर सकारात्मक प्रभाव खबरों का पड़ा था। जहां तक खबरों के नकारात्मक पहलू की बात है तो वर्तमान समय में नकारात्मक खबरें ही फायदेमंद है। क्योंकि इन खबरों से जनता में डर पैदा होगा, जिससे कोविड के प्रोटोकॉल को पालन करने के लिए यह खबरें सहायक होती हैं। पाठक के धारणा के कारण ही वह इन चीजों का पालन करता है। वही पत्रकारिता के माध्यम से न्यायपालिका, सरकार और प्रशासन को फीडबैक मिलता है। उन्होंने पत्रकारों से निवेदन किया कि सकारात्मक खबरें प्रमाणिक खबरों को छापे वही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के बारे में भी खबरों को सही तरीके से दिखाएं जहां तक पत्रकारिता जगत को आर्थिक नुकसान की बात है। तो सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए।

प्रोफेसर राम मोहन शुक्ला कुलपति नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय प्रयागराज ने एक महत्वपूर्ण बात बताई की वर्तमान महामारी में सांस और संचार का कितना महत्व है। यह दोनों एक दूसरे के अटूट रिश्ते में बंधे हुए हैं दोनों की वर्तमान समय में क्या आवश्यकता है। जहां सांस जीवन है वही जीवन संचार है। इस वैश्विक बिमारी में पत्रकारिता दांव पर लगी हुई है। मृत्यु का भय सता रहा है। विगत 20 वर्षों में पत्रकारिता जगत में काफी परिवर्तन हुआ है जो आज हमारी जीवनशैली का अंग हो गया है। पहले न्यूज़ हुआ करती थी वह आज स्टोरी का रूप ले लिया है। खबरों की प्रमाणिकता के लिए खबरों को चेक करना, री चेक करना, क्रॉस चेक करेंगे तो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के साथ पांचवा स्तंभ के तौर पर भी कार्य कर पाएंगे। खबरों को लिखने और दिखाने के पहले आत्म संयम बरतना सत्य खबर दिखाना। पत्रकारों को जनता की अदालत के रूप में काम करना चाहिए। वर्तमान समय में पत्रकार अपनी भूमिका का निर्वहन बहुत अच्छी तरह से कर रहे, कुछ सुधार की आवश्यकता है।

अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एडीएन बाजपेई ने अपने उद्बोधन में स्वतंत्रता के पूर्व एक पत्रकार की ताकत और हिम्मत क्या होनी चाहिए बताने के लिए पंडित मदन मोहन मालवीय का नाम लिया उन्होंने बताया कि जब जलियांवाला बाग का हत्याकांड हुआ था। अंग्रेजों के भय के कारण किसी भी पत्रकार को उस पर लिखने की हिम्मत नहीं हुई थी। लेकिन मदन मोहन मालवीय ने वहां जाकर पीड़ित लोगों से मिलकर उनकी खबर लिखी।

उन्होंने आजाद हिंद फौज का उदाहरण देते हुए रोटी पर कमल का निशान बनाकर सूचना देने का तरीका बताया। पत्रकारिता को प्रजातंत्र में पहला स्तंभ कहना चाहिए। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी और ऐसा होना चाहिए वही न्यूज़ चैनलों को प्रमाणिक खबर दिखाना चाहिए। टीआरपी बढ़ाने के चक्कर में खबरों में सत्यता प्रतीत नहीं होती है। खबरों को नकारात्मक नहीं होनी चाहिए सकारात्मक एवं ज्ञानवर्धक होनी चाहिए । जिससे जनता का भरोसा पत्रकारिता पर बना रहे। कार्यक्रम की समन्वयक प्रोफ़ेसर श्रिया साहू ने समस्त अतिथियों का परिचय उनकी मुख्य बातें बताई। समन्वयक प्रोफेसर सौमित्र तिवारी कार्यक्रम में आमंत्रित सभी वक्ता मुख्य अतिथि कार्यक्रम के अध्यक्ष कुलपति कुलसचिव के द्वारा कहीं बातों को अपनी बातों के द्वारा उन्होंने इस कार्यक्रम को लघु कुंभ नाम दिया।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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