बिलासपुर। ऑन लाईन शराब मंगाने वाले कई उपभोक्ताओं के साथ धोखा हो रहा है। सुबह वो इस आस में शराब की ऑन लाईन ऑर्डर करते है कि शाम तक शराब की बोतल उन तक पहुंच जाएगी। इस हिसाब से ऐसे लोग चखना आदि की ब्यवस्था करके रखते है लेकिन ठीक टाइम में उन्हें बताया जा रहा है कि उसका ब्रांड समाप्त हो गया है।
कोई भी ब्यवस्था मुकम्मल नहीं होती, कुछ न कुछ खामियां रह ही जाती है। सरकार के ऑन लाईन शराब बेचने के निर्णय में भी यही हो रहा है। शराब के शौकीन सरकार के ऑन लाईन शराब बेचने के फैसले से बेहद खुश है। ऐसे लोग पोर्टल ओपन होते ही शराब का ऑर्डर देने के लिए टूट पड़ते है। ऑन लाइन शराब खरीदने वालों की संख्या इतनी ज्यादा है कि कंपनी का एप क्रैश हो जा रहा है। फिर भी ऑर्डर करने वाले लगातार एप में भिड़े रहते है। ताकि समय पर उन्हें शराब मिल जाए। ऑन लाईन ऑर्डर करने वालों की सबसे ज्यादा भीड़ सुबह से लेकर दोपहर तक रहती है। ऑर्डर करने वालों की सोच रहती है की सुबह ऑर्डर करेंगे तो शाम होते-होते उनका ब्रांड उन तंक पहुंच जाएगा। इसी लिहाज से चखना की तैयारी भी होती है। मांसाहार मुर्गा, मटन या मछली बनाने की तैयारी ले लग जाते है तो शाकाहारी अपने हिसाब से चखना की ब्यवस्था समय से पहले कर लेते है। इसके बाद इंतजार शुरू होती है शराब की। ज्यादातर लोगों के पास तो समय पर शराब पहुंच जा रहा है कम्पनी के वर्कर समय पर शराब की बोतल पहुंचा दे रहे है। लेकिन जिनको मिलने में देरी होती है वो बारबार मोबाइल में लगे रहते है कि कब OTP आए तो बात बने। जब तक OTP नंबर नही आता पियक्कड़ों में कब आएगा – कब आएगा वाली बेचैनी छाई रहती है। अब कल्पना करिए कि सारा चखना तैयार है, बस शराब के बोतल का ही इंतजार है और शराब की सप्लाई करने वाली कंपनी मेसेज करे की आपने जो ब्रांड मंगाया था वो समाप्त हो गया है …। ऐसा सभी के साथ तो नही हो रहा है लेकिन कुछ मदिरा प्रेमियों के साथ ऐसा धोखा हो रहा है। ओर वो अपने सिर की बाल नोचने के लिए मजबूर हो जा रहे है। जबकि ऑनलाइन शराब मंगाने वालों का दावा है कि उन्होने आबकारी विभाग की लिंक को देखकर उसमें उपलब्ध ब्रांड की शराब के लिए ही पैसे भेज कर ऑर्डर किए थे। ऐसे लोगों का आरोप है कि आबकारी विभाग ने उनके साथ धोखेबाजी कर रहा है। जब उनसे पूछा गया की आबकारी विभाग ने आपके पैसे तो वापस कर दिए हैं ना.. तो एक ऑनलाइन उपभोक्ता ने जवाब दिया वह पैसे भी हमारे खाते में 7 दिनो के बाद आएंगे। लेकिन उनकी तो शाम खराब हो ही गया। ऐसी स्थिति में विभाग को दूसरे ब्रांड की शराब देनी चाहिए ताकि उनकी ब्यवस्था बेकार न जाए।
गौरतलब है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं आबकारी मंत्री के द्वारा राज्य के मद्यप्रेमियों की प्यास दूर करने और सरकार का खजाना भरने के इरादे से ऑनलाइन शराब की बिक्री का निर्णय लिया है। हालांकि इसके पीछे सरकार और आबकारी मंत्री का कहना कुछ और ही है। उनका कहना है कि प्रदेश में शराब नहीं मिलने के कारण उसके विकल्प के रूप में लोग दवा और सैनिटाइजर को पी कर मरने लगे। इसे देखते हुए ही सरकार ने ऑनलाइन शराब बेचने का निर्णय लिया। जिससे मद्य प्रेमियों को शराब की घर पहुंच सेवा उपलब्ध हो सके।
00 पोर्टल में विकल्प की हो ब्यवस्था
ऑन लाईन शराब मंगाने वालों का कहना है कि सरकार की ओर से ऑन लाईन ऑर्डर के लिए जो एप बना है उसमें एक ही ब्रांड का विकल्प है। जबकि एप में दूसरे विकल्प की ब्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि एन वक्त में किसी ब्रांड की शराब खत्म हो जाए तो ग्राहक के दूसरे विकल्प पर विचार किया जा सके। इससे पीने वालों की शाम खराब नही होगी और बेवजह का तनाव नही झेलना पड़ेगा।
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